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अनु सुचित जन जातियों को आरक्षण में बढ़ोतरी की मांग


सोनो जमुई संवाददाता चंद्रदेव बरनवाल की रिपोर्ट

  • पांच राज्यों की जनजातियों को अनुसूचित जनजाति एस टी में शामिल किया गया लेकिन आदिवासियों को ठगने और लूटने में लगे हें केंद्र की मोदी सरकार
  • करोड़ों नये लोगों को अनुसूचित जनजाति में जोड़ रहे हें लेकिन आरक्षण में कोई बढ़ोतरी नही 
  • यही नीति बिहार की नीतिश कुमार सरकार की रही है , जिसमे बहुत सारे जातियों के लोगों को अनुसूचित जनजाति में सामिल किया लेकिन आरक्षण सिर्फ एक प्रतिशत ही रखा गया है , पृथ्वीराज हेमब्रम

 जमुई: प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में अनुसूचित जनजाति ( एस० टी० ) श्रेणी में पांच राज्यों की जनजातियों को शामिल करने के लिए मंजूरी दे दी है जिसमें छत्तीसगढ़ , हिमाचल प्रदेश , तमिलनाडु , कर्नाटक और उत्तर प्रदेश की जनजातियों को एसटी श्रेणी में शामिल करने को मंजूरी दी गई है । इसमें 12 समुदायों को एसटी सूची में शामिल किया गया है । साथ ही हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के ट्रांस गिरी क्षेत्र में रहने वाले हाटी समुदाय भी शामिल हें । इस समुदाय का नाम हाट नामक छोटे शहरों के बाजारों में घरेलू फसलों , सब्जियों , मांस और ऊन को बेचने के अपने पारंपरिक व्यवसाय के आधार पर रखा गया है । उक्त बातें झारखंड मुक्ति मोर्चा के बिहार संयोजक पृथ्वीराज हेम्ब्रम ने कही । उन्होंने कहा कि यह समुदाय 1967 से ही एस० टी० का दर्जा देने की मांग कर रहा है , जब उत्तराखंड के जौनसार बावर इलाके में रहने वाले लोगों को यह दर्जा दिया गया था , जिसकी सीमा सिरमौर जिले से लगती है ।

साथ ही अन्य समुदायों को हाल ही में एसटी का दर्जा दिया गया था , उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में उनकी पांच उप जातियों के साथ गोंड एवं कर्नाटक में बेट्टा कुरुबा समुदाय , छत्तीसगढ़ में बिंझिया और तमिलनाडु में नारीकुरवन और कुरुविकरण थे ।

तमिलनाडु में नारीकुरवन और कुरुविकरण 1965 से लोकुर पैनल की सिफारिशों के आधार पर एसटी दर्जे की मांग कर रहे हैं । उन्हें पहले सबसे पिछड़े समुदाय के रूप में मान्यता दी गई थी । केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एसटी सूची में बेट्टा कुरुबा समुदाय को “ कडू कुरुबा ” के पर्याय के रूप में शामिल किया गया है । कर्नाटक के चामराजनगर , कोडागु और मैसूरु जिलों में बेट्टा कुरुबा जनजाति पिछले 3 दशकों से एसटी का दर्जा देने की मांग कर रही है , लेकिन वर्तनी की त्रुटियों और समान लगने वाले नामों के कारण इसे प्रदान नहीं किया गया है । एसटी सूची में नए सूचीबद्ध समुदायों को देश में अनुसूचित जनजातियों को लक्षित करने वाली मौजूदा योजनाओं से लाभ होगा । इनमें से कुछ लाभों में पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति , विदेशी छात्रवृत्ति और राष्ट्रीय फेलोशिप , राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त और विकास निगम से रियायती ऋण और छात्रों के लिए छात्रावास शामिल हैं । इन समुदायों के सदस्यों को शैक्षणिक संस्थानों में सेवाओं और प्रवेश में आरक्षण से भी लाभ होगा ।

देश में आदिवासियों को मिलने वाली आरक्षण को 14 प्रतिशत किया जाना चाहिए , और बिहार में एक प्रतिशत से आठ प्रतिशत बढ़ाया जाने की मांग श्री हैम्ब्रम ने की है । इस के लिए देश की सभी राज्यों में आंदोलन हो , आसाम की संथाल को आदिवासी का दर्जा प्राप्त हो । उन्होंने बिहार में अविलम्ब आठ प्रतिशत आरक्षण आदिवासियों के लिए लागू करने की मांग की है ।

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