Breaking News

संतान प्राप्ति ओर लंबी आयु की कामना का व्रत जिउतिया का समापन


सोनो जमुई संवाददाता चंद्रदेव बरनवाल की रिपोर्ट 

जमुई: तीन दिवसीय संतान प्राप्ति ओर पुत्र की लंबी आयु की कामना का व्रत जिउतिया सोमवार को जित मोहन बाबा का पुजा अर्चना के बाद समापन हो गया है । शनिवार को नहाय खाय के साथ शुभारम्भ हुई जिउतिया का पर्व जमुई जिले की समस्त महिलाओं ने रविवार को पुत्र की प्राप्ति ओर उनकी लंबी आयु की कामना के लिए निर्जला उपवास रखा , तत्पश्चात सोमवार को जीमुत वाहन भगवान की पूजा अर्चना के बाद इस पर्व का समापन किया । जिउतिया पर्व को जिवित्पुत्रिका एवं जीमुतवाहन व्रत भी कहा जाता है । वैसे तो भारत को त्योहारों का देश कहा जाता है , क्योंकि क्ई धर्म और समुदाय के लोग यहां निवास करते हैं । 

जिस कारण भारत में हरेक दिन कोई ना कोई त्योहार मनाया जाता है , एवं सभी त्योहारों का अपना एक अलग महत्व होता है । साथ ही भारत वर्ष के लोग इन सभी त्योहारों को बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाते हैं । जिसका मुख्य कारण यह भी है कि त्योहारों पर लोगों को अच्छे अच्छे व्यंजन खाने को मिलती है । साथ ही रोजमर्रा की जिंदगी में एक दिन का अवकाश भी प्राप्त होती है । जिस कारण लोग इसे ओर अधिक उत्साह के साथ मनाते हैं । इसी त्योहारों में से एक हिंदू का त्यौहार है जिउतिया , जिसमे माताएं अपने बच्चों की लम्बी उम्र के लिए व्रत रखती है और पुजा भी करती हैं । आश्विन मास कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि को महिलायें निर्जला उपवास रखकर विधि पूर्वक पुजा अर्चना के साथ इस पर्व को मनाती हैं । 

महेश्वरी गांव स्थित बाबा लक्ष्मी नारायण मंदिर के मुख्य पुजारी सह भक्ति जागरण के कलाकार श्री मुकेश पांडेय ने बताया कि जिउतिया पर्व मुख्य रूप से सुहागिन मातायें अपने पुत्र की लंबी आयु की प्राप्ति के लिए कठीन तपस्या के साथ करती हैं एवं कुछ महिलाएं संतान की प्राप्ति की इच्छा से करती हैं । उन्होंने बताया कि महा भारत युद्ध में जब द्रोणाचार्य को मारा गया तो उनके पुत्र अश्वत्थामा ने क्रोध में आकर अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के पेट में पल रहे बच्चे को मारने के लिए ब्रह्मास्त्र का इस्तेमाल कर दिया । इस विकट परिस्थिति में भगवान श्रीकृष्ण ने अपने जीवन के सारे पुन्य उस शिशु को देकर उसे जीवन दान दे दिया । जिसके फलस्वरूप वह ब्रह्मास्त्र से मरने के बाद भी जीवित हो गया । तभी से भारत वर्ष की माताओं द्वारा अपने पुत्र की रक्षा और लंबी आयु की कामना को लेकर जीवित्पुत्रिका का व्रत किया जाने लगा ताकि भगवान श्रीकृष्ण उनके संतान की रक्षा करें ।

कोई टिप्पणी नहीं

Type you comments here!