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सत्य सनातनी पर्व दीपावली का महात्म्य


🖋️ भारत साहित्य रत्न अभिषेक कुमार

ब्लॉक मिशन प्रबंधक- लालगंज (आजमगढ़)

ग्राम्य विकास विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार

   भारतीय सत्य सनातन सभ्यता संस्कृति में एक से बढ़ कर एक पर्व-त्योहार है जो आध्यात्मिकता और वैज्ञानिकता दोनो के दृष्टिकोण से अहम हैं। हरियाली के चादर ओढ़े प्रकृति जहाँ खरीफ के मुख्य फसल धान के पौधों से शर्माते निकलते हुए उसकी बालियों के बीच प्रत्येक वर्ष शरद ऋतु में कार्तिक माह के कृष्णपक्ष में जब चाँद पूरी रात के लिए गगन से गायब होता है तो उस अमावस की काली रात में कोई एक ऐसा कोना नहीं बचता जहाँ दीप न जला हो। इसी दिन त्रेतायुग में भगवान श्री राम लंका से आतातायी रावण पर विजय पाकर तथा 14 वर्ष वनवास में अपनी लीला संवरण कर अयोध्या लौटे थे तो अयोध्या वासियों ने प्रभु श्री राम के स्वागत में पूरे अयोध्या में गाय के घी के दीप जलाए थे। 

वर्षो से यह परंपरा चली आ रही है कि दीपावली वाली रात के पूर्व और विजय दशमी दशहरा के बाद से घर, आंगन, गालियां, सड़के, दुकान तथा प्रतिष्ठानो को विशेष सफाई अभियान चला कर साफ-सुथरा किया जाता है। वर्षो के जमी धूल, गंदगी और मकरा के झाले साफ-सफाई किये जाते हैं तथा मिट्टी के घर आँगन दरवाजे को देसी गाय के गोबर से लीपे जाते है। 

वास्तव में सफाई कितना आवश्यक एवं महत्वपूर्ण है यह दीपावली का पर्व हम सभी को इससे अवगत कराता है। इस वसुंधरा पर मानव द्वारा बनाये गए समस्त रचनाओं का शृंगार होता है। सभी अपना-अपना नया तन-बदन, रंगाई-पोताई, तरुणाई के अंगड़ाई से अभिभूत हो जाते हैं। घर प्रतिष्ठानों में रखी प्रत्येक वस्तु को झाड़-पोंछ कर सुसोभितमान कर दिया जाता है और रात्रि में सभी में ईश्वर के अंश मानकर पूजा अर्चना होता है तथा उनके समीप दीप जलाये जाते हैं। घरों के छतों पर लटकने वाला अद्भुत कारीगरी और बिभिन्न आकारों में रंग-विरंगे निर्मित कैंडिल के अंदर दीप प्रज्ज्वलन के सौंदर्य का क्या कहना...! बच्चे बड़े सभी इसे बहुत शिद्दत से नकासी करते हैं।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी साफ- सफाई के प्रति अति संवेदनशील थे। भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने भी स्वयं झाड़ू हाँथ में लेकर स्वच्छता का विशेष अभियान चलाया। स्वच्छता से मन प्रफुल्लित एवं आनंदित होता है। जहाँ स्वच्छता है वहाँ मच्छर नही हैं और मच्छर से होने वाले तमाम बीमारियों का खतरा भी नहीं। जहाँ स्वच्छता है वहीं ईश्वर का वास भी है, और जहाँ ईश्वर का वास है वहीं तरक्की खुशहाली भी है। तभी तो दीपावली के रात माता लक्ष्मी और गणेश जी का पूजन होता है। माता लक्ष्मी धन, समृद्धि और बरक्कत के देवी ऊर्जा के स्रोत हैं वहीं गणेश जी विध्न, बाधाओं को हर्ता सकारात्मक ऊर्जा के स्रोत। दीपावली के अंधेरी अमावस की रात पूरा भारत वर्ष घी और तीसी के तेल के दिये से जगमगा उठते हैं, अंतरिक्ष से देखने में कितना अद्भुत और विशाल लगता होगा न..? मानो पूरा सितारे धरती पर उतर आये हों। वाराणसी और अयोध्या के घाटों पर एक साथ लाखों दिए का जलना कितना भव्य और सुंदर लागता है। यह अलौकिकता का परमानंद तो स्वर्ग में भी नहीं है। दीपावली का त्यौहार मानो अंधेरे दिल में दिया जलाने का संदेश दे रहा है कि हे मानव डगर कितना भी अंधेरा, सुनसान क्यों न हो उम्मीद और विश्वास का दीपक जलाये रखना एक न एक दिन सफलता जरूर कदम चूमेगी। सत्य का सर्वदा जीत होता है और झूठ असत्य का नाश होता है।

देसी गाय के घी और तीसी के तेल से प्रज्वलित दिये वायुमंडल के हानिकारक कीटो को प्राणान्त भी करते और नकारात्मक ऋणात्मक ऊर्जाओं को सोखते भी है जिससे मानव सभ्यता संस्कृति उमंग और ऊर्जा से लबरेज पुष्पित और पल्लवित होता रहे। यह बात अलग है कि चाइनीज लाइटो ने सेंधमारी की है और सहज उपलब्धता तथा सस्ते, मनभावन आकर्षणों ने भारतीयों के मन को लुभाया है। पर दीपावली हम सभी को पारंपरिक तरीके से ही मनाना चाहिए इसमें आध्यत्म संस्कृति और विज्ञान तीनो छिपा हुआ है। वर्तमान समय में दीपावली के दिन बम-पटाखा छोड़ने की भी धूम मची हुई है। पर यह समझना होगा कि उच्च गुणवत्ता के बम पटाखे से निकली तेज ध्वनियाँ, ध्वनि प्रदूषित तो करती ही है साथ ही साथ पक्षियों के जीवन शैली पर भी गहरा प्रभाव डालती है। इस बम पटाखे फटने से वातावरण में बहुत ही खतरनाक धुआं निकलता है जिससे मानव और पक्षियों दोनो पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। बम पटाखे से अमूमन किसी न किसी के शारीरिक नुकसान, अंग खण्डन होने की खबरे मिलती रहती है। पटाखे मानव और पर्यावरण हितकारी नहीं है इसे परित्याग करना बुद्धिमानी है।

इस पावन प्रतिपदा को बौद्ध, सिख और जैन धर्म के लोग भी मानते हैं। सिख धर्म के लोग इस दिन बंदी छोड़ दिवस मानते हैं वहीं जैन धर्म के लोग महावीर के मोक्ष दिवस के रूप में मनाते हैं। दीपावली के ठीक दूसरे दिन  दरिद्रता, क्लेश को भगाने का क्रिया किया जाता है तदुपरांत अगले दिन गोवर्धन पूजा होती है जिसमें मईया के बाद सबसे अधिक दूध पिलाने वाली तथा गो रस के उत्पाद जैसे की घी, पनीर, छेना, रसगुल्ले, दही, छांछ, पेड़ा, खोया आदि बलवर्धक,य पुष्टिवर्धक खिलाने वाली गौ माता की पूजा होती है।

अतः इस आधुनिकता, व्यावसायिक भाग-दौड़ भरे युग में पर्व-त्योहारों में पौराणिकता, पारंपरिकता के सोंधी महक को कभी नहीं भूलना चाहिए तथा पूरे हर्षोल्लास से एक से बढ़ कर त्योहारों का आनंद लेना चाहिए। इस दिन सरकारी-गैर सरकारी सभी संस्थानों में छुटियाँ होती है परिवार स्नेहीजनों के साथ खूब आनंद मस्ती करना चाहिए एवं इन विशेष तिथियों में बड़े बुजुर्गों से आशीर्वाद लेना कदापि न भूलना चाहिए।


दीपो का पर्व दीपोत्सव दीपावली की ढेर सारी मंगलमयी शुभकामनाएं


भारत सहित्यय रत्न अभिषेक कुमार

साहित्यकार, समुदायसेवी, प्रकृति प्रेमी व विचारक

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