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पढ़ाई के लिए जान से खिलवाड़


वैशाली:
राघोपुर खतरे के निशान पर बहती गंगा के बीच नाव पर सवार होकर करीब एक सौ बच्चे राघोपुर से पटना आते हैं l वजह है उन्हें प्राइवेट स्कूल में अच्छी पढ़ाई करनी है l बच्चे बाढ़ के पानी में उफनती गंगा के बीच से गुजरते हैं डर भी नहीं लगता है l पूछने पर कहते हैं कि डर के आगे जीत है l यह जज्बा राघोपुर प्रखंड के बच्चों में हर रोज दिखाई दे रहा है l रुस्तमपुर, मलिकपुर, चांदपुरा, बहरामपुर, मोहनपुर एवं अन्य पंचायतों के करीब 100 नन्हे बच्चे हर दिन बेहतर शिक्षा के लिए गंगा नदी पार कर पटना जिला के फतुहा, बंका घाट, जेठूली घाट के इलाके में पढ़ने जाते हैं l राघोपुर के बारे में जरूरत नहीं है कि यह वर्तमान उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव का चुनावी इलाका है l यह सवाल अलग है कि यहां अभी तक वैसी सुविधाएं विकसित नहीं हो सकी है कि इन नन्हे मुन्ने को जान जोखिम में ना डालने पड़े l यह बात हर साल की है l बारिश के मौसम में जब पीपा पुल खुल जाता है, काव्य दिक्कत होती है l इसके बाद तीन से चार महीने नाव से ही बच्चों को पढ़ाई के लिए लाया और ले जाया जाता है l बाढ़ के इस मौसम में नदी की चौड़ाई करीब 1 किलोमीटर हो जाती है l आम दिनों में आधा किलो मीटर रहती है l जो पार करने के लिए पीपा पुल का सहारा लिया जाता है l हालांकि तेज हवा या खराब मौसम में बच्चों की सुरक्षा के लिए नाव पर ना तो कोई लाइफ जैकेट है, ना कोई सुरक्षा उपकरण l इस बारे में बात करने पर नाव पर मौजूद शख्स कहता है कि कोई दूसरा उपाय नहीं है क्या करें l रुस्तमपुर ओपी थाना अध्यक्ष शुभ नारायण प्रसाद यादव बताते हैं कि 23 वर्षों से यह सिलसिला चलता रहा है l पटना के ओर के स्कूल संचालक के द्वारा अपने नाम से बच्चों को लाया और ले जाया जाता है l स्कूल वाले हैं बच्चों को घर तक छोड़ते हैं l उन्होंने कहा कि जब गंगा नदी में पानी बढ़ता है तो पीपा पुल खोल दिया जाता है l इसके बाद नाव का इस्तेमाल केवल स्कूली छात्रों के लिए किया जाता है।

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