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दिपावली में मिट्टी का दिया जलाना सर्वोत्तम, होती हैं कीट पतंगों का नाश


सोनो जमुई संवाददाता चंद्रदेव बरनवाल की रिपोर्ट

हर घर में होने वाली खुशियों का त्यौहार दिपावली आगामी 24 अक्टूबर को होगी । जिसमे लोग धन ऐश्वर्य की देवी मां लक्ष्मी की पूजा अर्चना कर धन धान्य से परिपूर्ण होने की कामना करते हुए इस त्योहार को दिपोत्सव के रूप में मनाते हैं । लोग जहां मिट्टी से बने दिये में घृत , सरसों का तेल , कोंदी का तेल , अंडी का तेल आदि डालकर घर के चारों ओर जलाते हुए इस त्योहार को हर्षोल्लास पूर्वक मनाते हैं । वहीं आधुनिकता के इस दौर में दिपावली पर्व में दीप की जगह मोमबत्तियां ने ले ली । इसके साथ ही समय के साथ साथ इस त्योहार का स्वरूप बदलता गया और लोगों ने पुरानी परंपरा को भुलाकर बिजली की रंग बिरंगी लड़ियां ओर चायनिज बल्वों से अपने घरों को सजाने लगे हैं । लिहाजा इस त्योहार का ना सिर्फ स्वरूप बदला बल्कि कड़ी मेहनत कर मिट्टी का दिए की अस्तित्व पर संकट आ गई है । जिस कारण मिट्टी का दिया तैयार करने वाले कुम्हारों की रोजी रोटी छिनने लगी है । जबकी मिट्टी के दिए जलाने से जहां लोग प्रदुषण मुक्त रहते हैं वहीं इस दिये से निकलने वाली धुंआ से फसलों को नष्ट करने वाली किट पतंगों का नाश हो जाता है ।

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